

Stem Cell Therapy for Autism Treatment को Indian Court द्वारा Ban किया गया। Stem cell Therapy एक तरह का treatment होता जब था जिसका इलाज Autism के treatment के लिए भी किया जाता है जिसमे बच्चे के brain में damaged cell की जगह healthy cells replace किए जाते है। लेकिन अब Stem Cell Therapy की जगह आप सिर्फ Therapy ही करवा सकते हैं जिसमे CBT, OT, SIT, Speech Therapy और अन्य therapy भी शामिल होती है। NMC (National Medical Council) के officials द्वारा ये कहा गया है की अब Autism के treatment के लिए Stem Cell Therapy recommend नहीं की जाएगी क्योंकि एक report में ये पाया गया की एक 15 साल के लड़के की stem cell therapy हुई थी जिससे बच्चा ज्यादा hyper हो गया और अपने parents को मारने लग गया। बच्चें के parents का कहना हैं कि stem cell therapy से पहले उनका बच्चा कम aggressive था लेकिन stem cell therapy के बाद उनके बच्चे में नया symptom आ गया हैं और उनका बच्चा ज्यादा hyper हो गया हैं। Stem Cell Therapy के और भी case है जिसमे parents ने इस से उनके बच्चे में होने वाले नुकसान के बारे में अपील की है। क्योंकि Stem Cell Therapy में लाखों रुपए का खर्चा आता था जिसमे कई parents तो अपनी जमीन, गहने तक गिरवी रख देते थे ऐसा इसलिए होता था क्योंकि Stem Cell Therapy को लेकर social media पर advertisement और promotion की जा चुकी हैं। 14 December 2022 को कोर्ट में reports के मुताबिक Autism के treatment में Stem Cell Therapy के लिए कोई scientific basis नहीं है। Autism एक chronic condition है जिसके results slow आते हैं। Stem Cell Therapy के लिए खर्चा भी बहुत आता हैं Stem cell Therapy के दौरान कई parents बीच में ही Stem Cell Therapy को छोड़ देते है और Therapy opt कर लेते है। Autism के treatment में Stem Cell Therapy के लिए न तो कोई international guidelines है और न ही medical studies/education हैं। National Medical Council , NMC ने doctors को warn किया हैं की अगर वे autism के treatment के लिए Stem Cell Therapy की advertising और promotion agencies को बड़ावा देते हैं तो उनके against strict action लिए जाएंगे।
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